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11

1 जब इस्राएल बालक था, तब मैं ने उस से प्रेम किया, और अपने पुत्रा को मि से बुलाया।

2 परन्तु जितना वे उनको बुलाते थे, उतना ही वे भागे जाते थे; वे बाल देवताओं के लिये बलिदान करते, और खुदी हुई मूरतों के लिये धूप जलाते गए।।

3 मैं ही एप्रैम को पांव- पांव चलाता था, और उनको गोद में लिए फिरता था, परन्तु वे न जानते थे कि उनका चंगा करनेवाला मैं हूं।

4 मैं उनको मनुष्य जानकर प्रेम की डोरी से खींचता था, और जैसा कोई बैल के गले की जोत खोलकर उसके साम्हने आहार रख दे, वैसा ही मैं ने उन से किया।

5 वह मि देश में लौटने न पाएगा; अश्शूर ही उसका राजा होगा, क्योंकि उस ने मेरी ओर फिरने से इनकार कर दिया है।

6 तलवार उनके नगरों में चलेगी, और उनके बेड़ों को पूरा नाश करेगी; और यह उनकी युक्तियों के कारण होगा।

7 मेरी प्रजा मुझ से फिर जाने में लगी रहती है; यद्यपि वे उनको परमप्रधान की ओर बुलाते हैं, तौभी उन में से कोई भी मेरी महिमा नहीं करता।।

8 हे एप्रैम, मैं तुझे क्योंकि छोड़ दूं? हे इस्राएल, मैं क्योंकर तुझे शत्रु के वश में कर दूं? मैं क्योंकर तुझे अदमा की नाई छोड़ दूं, और सबोयीम के समान कर दूं? मेरा हृदय तो उलट पुलट हो गया, मेरा मन स्नेह के मारे पिघल गया है।

9 मैं अपने क्रोध को भड़कने न दूंगा, और न मैं फिर एप्रैम को नाश करूंगा; क्योंकि मैं मनुष्य नहीं परमेश्वर हूं, मैं तेरे बीच में रहनेवाला पवित्रा हूं; मैं क्रोध करके न आऊंगा।।

10 वे यहोवा के पीछे पीछे चलेंगे; वह तो सिंह की नाईं गरजेगा; और तेरे लड़के पश्चिम दिशा से थरथराते हुए आएंगे।

11 वे मि से चिड़ियों की नाईं और अश्शूर के देश से पण्डुकी की भांति थरथराते हुए आएंगे; और मैं उनको उन्हीं के घरों में बसा दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।।

12 एप्रैम ने मिथ्या से, और इस्राएल के घराने ने छल से मुझे घेर रखा है; और यहूदा अब तक पवित्रा और विश्वासयोग्य परमेश्वर की ओर चंचल बना रहता है।।

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